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The glory of Shiva worship in Shravan month and what should be offered on Shiva Linga on which Monday of Sawan, श्रावण मास में भोलेनाथ की पूजा की महिमा और सावन के किस सोमवार को शिव लिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए

श्रावण मास में भोलेनाथ की पूजा की महिमा


पूरे सावन मास के सभी सोमवार को किए गए व्रत पूजा अर्चना अभिषेक पूरे वर्ष किए गए व्रत के समान फल प्रदान करने वाली होती है, शिव को श्रावण मास इसलिए अधिक प्रिय है क्योंकि श्रावण मास में वातावरण में जल तत्व की अधिकता होती है एवं चंद्र जल तत्व का अधिपति ग्रह जो शिव के मस्तक पर सुशोभित है | शिव मंत्र उपासना में पंचाक्षरी मंत्र नमः शिवाय या ओम नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र इत्यादि मंत्रों के जप का भी श्रावण मास में विशेष महत्व है |

श्रावण मास में किए गए मंत्र जाप कई गुना अधिक प्रभावशाली सिद्ध होते देखे गए हैं जहां शिव पंचाक्षरी मंत्र मनुष्य को समस्त भौतिक सुख साधनों की प्राप्ति हेतु विशेष विशेष लाभकारी है वही   महामृत्युंजय मंत्र के जप से मनुष्य के सभी प्रकार के मृत्यु भय कष्ट दूर होकर उसे दीर्घायु की प्राप्ति होती है | महामृत्युंजय मंत्र रुद्राभिषेक आदि का सामूहिक अनुष्ठान करने से अतिवृष्टि, अनावृष्टि एवं महामारी आदि से रक्षा होती है एवं अन्य सभी प्रकार के उपद्रव की शांति होती है |

सावन माह के विभिन्न सोमवार को भिन्न-भिन्न वस्तु चढ़ाने की प्रथा है, आइए जानते है सावन के किस सोमवार को शिव लिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए जिससे भाग्य मजबूत होता है|

सावन के प्रथम सोमवार को भगवान शिव को क्या चढ़ाएं

शिव पुराण के अनुसार श्रावण मास में द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से समस्त तीर्थों के दर्शन का पुण्य एक साथ ही प्राप्त हो जाता है |पद्म पुराण के अनुसार सावन मास में द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से मनुष्य के समस्त शुभ कामनाएं पूर्ण होती है एवं उसे संसार के समस्त सुखों की प्राप्ति हो कर उसे शिव कृपा से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है | सावन के प्रथम सोमवार को कच्चे चावल की एक मुट्ठी शिवलिंग पर चढ़ाएं और साथ में बेल पत्र अवश्य चढ़ाएं |

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सावन के दूसरे सोमवार को भगवान शिव को क्या चढ़ाएं

सावन माह के बारे में एक पौराणिक कथा है कि- “जब सनत कुमारों ने भगवान शिव से सावन महीना प्रिय होने का कारण पूछा तो भगवान भोलेनाथ ने बताया कि “जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योग शक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था | अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया |

The Glory of Lord Shiva worship in Shravan month gives infinite blessings and to gain his blessings by offering things accordingly on Shiva Linga on each Monday of Sawan month.

पार्वती ने युवावस्था के सावन महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और शिव को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया, जिसके बाद ही महादेव के लिए यह माह विशेष हो गया”| इसलिए सावन के हर सोमवार को भगवान शिव की विशेष पूजा होती है | सावन के दूसरे सोमवार को शिव लिंग पर एक मुठ्ठी सफ़ेद तिल जरूर चढ़ाये और साथ में बेल पत्र अवश्य चढ़ाएं |

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सावन के तीसरे सोमवार को भगवान शिव को क्या चढ़ाएं

सावन की महत्ता को दर्शाने के लिए कई कहानी बताई गयी हैं जैसे कि मारकंडू ऋषि के पुत्र मारकण्डेय ने लंबी आयु के लिए सावन माह में ही घोर तप कर शिव की कृपा प्राप्त की थी, कुछ कथाओं में वर्णन आता है कि इसी सावन महीने में समुद्र मंथन किया गया था और मंथन के बाद जो विष निकला, उसे भगवान शंकर ने पीकर सृष्टि की रक्षा की थी|

किन्तु कहानी चाहे जो भी हो, बस सावन महीना पूरी तरह से भगवान शिव जी की आराधना का महीना माना जाता है. यदि एक व्यक्ति पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करता है, तो यह सभी प्रकार के दुखों और चिंताओं से मुक्ति प्राप्त करता है | सावन के तीसरे सोमवार को शिव लिंग पर एक मुठ्ठी ख़ड़े मूँग की चढ़ाये और साथ में बेल पत्र अवश्य चढ़ाएं |

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सावन के चौथे सोमवार को भगवान शिव को क्या चढ़ाएं

श्रावण मास में बिल्वपत्र चढ़ाने से कई गुना शुभ पल प्राप्त होते हैं। शिव कृपा पाने के लिए लक्ष्मी जी ने बिल्ववृक्ष का रूप लिया था, इसलिए शिव जी को बेल पत्र चढाने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है | यही बिल्वपत्र (बेलपत्र) अगर निम्न मंत्र के साथ चढ़ाया जाए तो इससे मिलने वाले पुण्य फल में और भी अधिक वृद्धि हो जाती है।

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्‌।
त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्‌॥

सावन के चौथे सोमवार को शिव लिंग पर एक मुठ्ठी जौ चढ़ाये|

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सावन के पाँचवें सोमवार को भगवान शिव को क्या चढ़ाएं

वैसे तो महीने में चार सप्ताह होते है, लेकिन कभी-कभी एक महीने में पाँच सोमवार भी हो जाते है, ऐसी स्थिति और भी गुणकारी होती है| ऐसी स्थिति में भगवान के पूजा के लिए एक और शुभ दिन मिल जाता है| सावन के सभी सोमवार को व्रत आदि करते हुए शाम के समय शिवलिंग के सम्मुख दीये अवश्य ही जलाने चाहिए, भगवान कुबेर शिवलिंग के सम्मुख एक दिया लगा के ही आज कुबेर हो गए है|

अतः जो भी व्यक्ति विधि विधान से सावन में शिव जी की पूजा करता है और उनके मंत्रों का जाप करता है, भगवान भोलेनाथ उसपर अपनी कृपा जरूर बरसाते  है| अब जानते है यदि सावन में पाँचवाँ सोमवार भी आए तो एक मुठ्ठी चने की सत्तू चढ़ाये |

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