A Hindu Temple where head skeleton of animals are hanging. The temple is very beautiful. In winter the temple is covered with the snow and its beauty increases due to Snow. Trees near the temple creates a very attractive environment. It is one of the holy places in Himachal Pradesh for Religious Journey

मंदिर जहाँ लटके हैं जानवरों के कटे शिर| पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में मनाली जाने का मौका मिला, सौभाग्य से वहां स्थित हिडिम्बा माता के दर्शन हुए, जिन्हें मनाली की कुलदेवी के रूप में जाना जाता है। आज हिडिम्बा माता से जुड़ी कुछ कहानी साझा कर रहे हैं, जो महाभारत से संबंधित है।

Recently, there was an opportunity to visit Manali in Kullu, Himachal Pradesh, fortunately there was a visit to Hidimba Mata, who is known as Kuldevi of Manali. Today Hidimba is sharing some story related to Mata, which is related to Mahabharata.

Manali

आप जानते हैं कि जुए में सब कुछ हारने पर धृतराष्ट्र व दुर्योधन ने पाण्डवों को वारणावत नाम स्थान (आज का मेरठ क्षेत्र) में भेज दिया था। जहां उन्हें जीवित जला देने की योजना बनाई गई थी। दुर्योधन के षड्यंत्र के बारे में जब विदुर को पता चला तो वे तुरंत ही वारणावत जाते हुए पांडवों से मार्ग में मिले और उन्होंने दुर्योधन के षड्यंत्र के बारे में बताया।

You know that after losing everything in gambling, Dhritarashtra and Duryodhana had sent the Pandavas to the place called Varanavat (today’s Meerut region). Where it was planned to burn them alive. When Vidur came to know about the conspiracy of Duryodhana, he immediately met the Pandavas en route to Varanavat and told about the conspiracy of Duryodhana.

फिर उन्होंने कहा कि ‘तुम लोग भवन के अंदर से वन तक पहुंचने के लिए एक सुरंग अवश्य बनवा लेना जिससे कि आग लगने पर तुम लोग अपनी रक्षा कर सको। मैं सुरंग बनाने वाला कारीगर चुपके से तुम लोगों के पास भेज रहा हूं। जिस दिन पुरोचन ने आग प्रज्वलित करने की योजना बनाई थी, उसी दिन पांडवों ने गांव के ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन के लिए आमंत्रित किया। रात में पुरोचन के सोने पर भीम ने उसके कमरे में आग लगाई। धीरे-धीरे आग चारों ओर लग गई। लाक्षागृह में पुरोचन तथा अपने बेटों के साथ भीलनी जलकर मर गई।

Then he said that ‘you guys must make a tunnel to reach the forest from inside the building so that you can protect yourself in case of fire. I am sending the tunnel builder to you secretly. On the day Purochan planned to ignite the fire, the Pandavas invited the Brahmins and the poor of the village for food. Made by Bhim gold Purocn night fire in her room. Gradually the fire started all around. In Lakshagriha, Bhilani died by burning purochan and her sons.


लाक्षागृह के भस्म होने का समाचार जब हस्तिनापुर पहुंचा तो पांडवों को मरा समझकर वहां की प्रजा अत्यंत दुःखी हुई। दुर्योधन और धृतराष्ट्र सहित सभी कौरवों ने भी शोक मनाने का दिखावा किया और अंत में उन्होंने पुरोचन, भीलनी और उसके बेटों को पांडवों का शव समझकर अंत्येष्टि करवा दी।

When the news of the Laksha Griha being consumed reached Hastinapur, the people there were extremely sad considering the Pandavas dead. All the Kauravas including Duryodhana and Dhritarashtra also pretended to be mourning and in the end they cremated Purochan, Bhilani and his sons as the dead bodies of the Pandavas.

A Hindu Temple where head skeleton of animals are hanging

A Hindu Temple where head skeletons of animals are hanging
Manali, Himachal Pradesh

लाक्षागृह की सुरंग से निकलकर पांडवजन हिंडनी नदी किनारे पहुंच गए, जहां पर विदुर द्वारा भेजी गई एक नौका में सवार होकर वे नदी पार कर दक्षिण दिशा की ओर बढ़े। कौरव यही सोचते रहे कि पांडवों की मौत हो गई है। यहां से बच निकलने के बाद पांडव कौरवों की नजरों से बचने के लिए जंगलों में वनवास काटते रहे। इसी दौरान जंगलों में चलते चलते वे एक राक्षस क्षेत्र में आ पहुंचे। जिस जंगल में हिंडिब नाम का राक्षस अपनी बहन हिंडिबा सहित रहता था।

Leaving the Lakshagriha tunnel, Pandavjan reached the banks of the Hindni River, where he crossed the river in a ferry sent by Vidur and headed south. The Kauravas kept thinking that the Pandavas had died. After escaping from here, the Pandavas kept cutting forest exodus in the jungles to escape from the eyes of the Kauravas. Meanwhile, while walking in the jungles, he came to a demon area. The forest in which the demon named Hindib lived with his sister Hindiba.

हिडिंब ने अपनी बहन हिंडिबा से जंगल में भोजन की तलाश करने के लिये भेजा परन्तु वहां हिंडिबा ने पांचों पांडवों सहित उनकी माता कुन्ति को देखा, पर भीम को देखते ही उससे प्रेम हो गया। इस कारण इसने उन सबको नहीं मारा जो हिडिंब को बहुत बुरा लगा। जिससे क्रोधित होकर हिडिंब ने पांडवों पर हमला कर दिया । लडाई में हिडिंब को मारा गया । फिर कुंन्ती के कहने पर भीम ने हिंडिबा से विवाह कर लिया । इन्हें घटोत्कच नामक पुत्र हुआ जिसने महाभारत की लड़ाई में अत्यंत वीरता दिखाई थी। जिसे भगवान श्रीकृष्णआ से इंद्रजाल (काला जादू) का वरदान प्राप्त था। उसके चक्रव्यूह को सिर्फ और सिर्फ खुद भगवान श्रीकृष्ण ही तोड़ सकते थे।

Hidimb sent his sister Hindiba to search for food in the forest, but there Hindiba saw her mother Kunti, including the five Pandavas, but fell in love with Bhima. For this reason it did not kill all those which Hidimb felt very bad. Enraged, Hidimb attacked the Pandavas. Hidimb was killed in battle. Then at the behest of Kunti, Bhima married Hindiba. He had a son named Ghatotkacha who showed great valor in the battle of Mahabharata. Who had the blessing of Indrajal (black magic) from Lord Sri Krishna. Only Lord Krishna could break his chakravyuh.


पाण्डुपुत्र भीम से विवाह करने के बाद हिडिंबा राक्षसी नहीं रही। वह मानवी बन गई। और कालांतर में मानवी से देवी बन गई। हिडिम्बा का मूल स्थान चाहे कोई भी रहा हो पर जिस स्थान पर उसका दैवीकरण हुआ है वह मनाली ही है। मनाली में देवी हिडिंबा का मंदिर बहुत भव्य और उतकृष्ठ है। मंदिर में जानवरों के कटे शिर चारो तरफ से टंगे हुए हैं | मंदिर के भीतर एक प्राकृतिक चटटान है जिसके नीचे देवी का स्थान पद चिन्ह के रूप में है। चटटान को स्थानीय बोली में ‘ढूंग कहते हैं इसलिए देवी को ‘ढूंगरी देवी कहा जाता है। देवी को ग्राम देवी के रूप में भी पूजा जाता है। ठण्ड के महीने में बर्फ से ढकी मंदिर की छटा देखते बनती है |

Hidimba did not become demonic after marrying Panduputra Bhima. She became a human. And in time, Manvi became a goddess. Whatever the original place of Hidimba has been, but the place where it has been divineized is Manali. The temple of Goddess Hidimba in Manali is very grand and splendid. In the temple, the cut heads of animals are hanging from all sides. There is a natural rock inside the temple, below which the goddess is placed as a footprint. Chattan is called ‘Dhuang’ in the local dialect, hence the goddess is called ‘Dhangari Devi’. The goddess is also worshiped as the village goddess. During the winter months, the shade of the temple covered with snow is seen.

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